बिहार में नए चुनावी वातावरण के साथ राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है। राजधानी पटना से लेकर दिल्ली तक नेताओं की बैठकों का सिलसिला जारी है। संभावित चुनाव कार्यक्रम और उसके बाद बनने वाली राजनीतिक समीकरणों को लेकर सभी दल सक्रिय हैं।
राज्य की राजनीति में इस समय सबसे ज़्यादा चर्चा गठबंधन की संभावनाओं को लेकर है। कई दलों के शीर्ष नेता लगातार मुलाकातें कर रहे हैं और माहौल संकेत दे रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कुछ बड़े राजनीतिक फैसले सामने आ सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, सत्तारूढ़ पक्ष में अंदरूनी बैठकों की गति बढ़ गई है, वहीं विपक्ष भी रणनीतिक रूप से बूथ स्तर तक की तैयारी में जुटा है। नेताओं के बीच जो बयानबाज़ी देखने को मिल रही है, उससे साफ है कि चुनावी मोर्चा अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। पटना में कई राजनीतिक दलों के दफ्तरों पर देर रात तक रणनीति तय करने का दौर जारी है।
सरकार गठन के संभावित समीकरण पर भी चर्चा तेज़ है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस बार गठबंधन गणित बेहद महत्वपूर्ण रहेगा, क्योंकि कई सीटों पर करीबी मुकाबले की उम्मीद है। दिल्ली में भी कई नेताओं की मुलाकातें हुई हैं जिन्हें बिहार राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
वहीं दूसरी तरफ जनता के बीच रोजगार, महँगाई, फसल खरीद, सड़क और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे चुनावी माहौल का बड़ा हिस्सा बनते दिख रहे हैं। दलों की कोशिश इन मुद्दों को अपने पक्ष में मोड़ने की है।
आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की ओर से दिशा-निर्देश और संभावित कार्यक्रम को लेकर भी घोषणा संभव है। इसके साथ ही बिहार की सियासत और तेज़ी से बदलते राजनीतिक समीकरणों पर सबकी नज़र बनी हुई है।

