सामुदायिक शौचालयों के निर्माण में गुणवत्ता की अनदेखी

स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत ग्राम सभाओं में सामुदायिक शौचालय बिना प्रशासनिक तकनीकी स्वीकृति के बनाए गए हैं। वहीं सरकार की मंशा है सामुदायिक शौचालय निर्माण से ग्राम सभाओं में बेहतर साफ-सफाई व्यवस्था सुनिश्चित हो सकें। वहीं ग्राम सभाओं में ग्रामीण खुले में शौच प्रथा से मुक्त सकें। ग्रामीण क्षेत्र में काफी संख्या में ग्राम प्रधानों द्वारा व्यक्तिगत शौचालय बनवाए गए। जिसके चलते काफी संख्या के लोग सामुदायिक शौचालयों का उपयोग करने से वंचित हो रहें हैं। ग्राम सभाओं में युद्व स्तर पर सामुदायिक शौचालय बनवाए गए। नाम न छापने की शर्त पर ग्राम प्रधानों ने बताया अधिकारियों ने दबाव में बिना एस्टीमेट के निर्माण कराया है। ग्राम प्रधानों ने व्यक्तिगत रूप से इंटर लॉकिंग, भवन सामग्री, मटेरियल खरीद का निर्माण कार्य कराया है। सामुदायिक शौचालय कंप्लीट होने के बावजूद अभी तक धनराशि का भुगतान न होने के कारण ग्राम सभा में काफी आक्रोश है। सरकार की मंशा है, सामुदायिक शौचालय निर्माण से ग्राम सभाएं खुले में शौच मुक्त होगी। मुख्य मार्ग के किनारे
सामुदायिक शौचालय को राहगीरों के प्रयोग से ग्राम सभाओं को आमदनी में इजाफा होगा। पूरे प्रकरण को लेकर एडीओ पंचायत मेवाराम ने बताया जिले पर रिपोर्ट भेज दी गई है। स्वीकृति मिलते ही ग्राम सभाओं को धनराशि का भुगतान करा दिया जायेगा।

रिपोर्ट – पी०डी० गुप्ता

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