तेजस्वी यादव की हार में प्रशांत किशोर की रणनीति बनी बड़ी वजह, BJP से ज़्यादा नुकसान ‘घर-घर अभियान’ से

अरुणेश मिश्रा विशेष संवाददाता

बिहार चुनाव में राजद नेता तेजस्वी यादव की हार को लेकर राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। विश्लेषकों के एक बड़े वर्ग का मानना है कि इस बार तेजस्वी को जितना नुकसान भाजपा के आक्रामक अभियान से नहीं हुआ, उससे कहीं अधिक चोट उन्हें प्रशांत किशोर के लगातार चलते घर-घर संवाद और संगठन की कमजोरियों को खुलकर जनता के सामने रखने वाले अभियान से पहुँची।

चुनाव के महीनों पहले ही प्रशांत किशोर ने बिहार की जनता के बीच यह नैरेटिव तैयार करना शुरू कर दिया था कि “राजद और उसके नेतृत्व में बदलाव की इच्छा नहीं है।” उनकी टीम गांव-गांव, टोला-टोला घूमकर लोगों से संवाद करती रही। इस दौरान PK ने खुले मंचों पर और छोटे समूहों में राजद की संगठनात्मक कमियों, उम्मीदवार चयन में गुटबाज़ी, और तेजस्वी की नेतृत्व क्षमता पर तीखे सवाल उठाए।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, PK का यह अभियान उन इलाकों में अधिक असरदार साबित हुआ जहाँ राजद परंपरागत रूप से मजबूत मानी जाती थी। कई ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाताओं ने स्वीकार किया कि “PK ने जो बात कही, वह पहली बार किसी ने खुलकर कही,” जिससे राजद के कोर वोटरों में भी संदेह की स्थिति बनी।

भाजपा और एनडीए के खिलाफ सीधी चुनावी लड़ाई लड़ते हुए भी तेजस्वी के लिए यह समानांतर चुनौती कहीं अधिक कठिन थी। भाजपा की रैलियाँ और स्थानीय मुद्दे अपना प्रभाव तो डाल रहे थे, लेकिन PK की छवि एक नीतिगत सलाहकार और तटस्थ राजनीतिक सुधारक की रही — ऐसे में उनकी कही बात को मतदाता सीधे खारिज नहीं कर पा रहे थे।

परिणामों के बाद कई राजनीतिक विश्लेषकों ने यह निष्कर्ष निकाला कि तेजस्वी यादव को जितनी हानि विपक्षी प्रचार से नहीं हुई, उससे ज़्यादा उनकी सामाजिक छवि, संगठनात्मक कमजोरी और उम्मीदों के बोझ को प्रशांत किशोर ने रणनीतिक रूप से उजागर कर दिया।

राजद के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न बताने की शर्त पर स्वीकार किया कि “बीजेपी से तो सीधा मुकाबला था, लेकिन PK ने हमारे घर के अंदर की कमज़ोरियों को बाहर ला कर नींव हिला दी।”

फिलहाल तेजस्वी यादव इस हार के कारणों की समीक्षा कर रहे हैं, लेकिन बिहार की राजनीतिक फिज़ा में यह चर्चा तेज है कि इस चुनाव में असली ‘गेमचेंजर’ PK साबित हुए, वह भी ऐसे वक्त में जब वे किसी गठबंधन या पार्टी के साथ औपचारिक रूप से जुड़े नहीं थे।

Related posts

Leave a Comment