भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने हाल ही में चीन का एक अहम और बेहद गोपनीय दौरा किया, जिसने दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों में नई सरगर्मी पैदा कर दी है। इस दौरे की न तो पहले से कोई आधिकारिक घोषणा की गई थी और न ही चीन पहुंचने के बाद कोई सार्वजनिक कार्यक्रम हुआ, जिससे यह दौरा कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
सूत्रों के मुताबिक, डॉ. जयशंकर ने बीजिंग में चीन के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की और सीमा विवाद, व्यापार, ब्रिक्स से जुड़े मुद्दों के साथ वैश्विक हालात पर बातचीत की। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक महीने से सार्वजनिक रूप से कहीं नजर नहीं आए हैं, जिससे कई तरह की अंतरराष्ट्रीय अटकलें लगाई जा रही हैं।
भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद को लेकर कई बार तनाव की स्थिति बन चुकी है। ऐसे में यह दौरा दोनों देशों के बीच संचार की बहाली और विश्वास निर्माण की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
चीन सरकार की ओर से इस मुलाकात को लेकर अब तक कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि बातचीत ‘रचनात्मक और गंभीर’ रही। कुछ विश्लेषक मानते हैं कि यह दौरा चीन की अंदरूनी राजनीतिक स्थिति और दक्षिण एशिया में बदलते रणनीतिक समीकरणों से भी जुड़ा हो सकता है।
जयशंकर की इस अचानक यात्रा ने भारत-चीन संबंधों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। अब देखना यह होगा कि इस मुलाकात से दोनों देशों के रिश्तों में कोई ठोस दिशा निकलती है या यह भी बीते वर्षों की तरह सिर्फ एक औपचारिक संवाद भर बनकर रह जाएगा।
