जब ये 11 वर्ष के थे तब इन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया। इनके दादा ने इन्हें पाल-पोष कर बड़ा किया।अमन ने गरीबी में कठिन बचपन बिताया। पहलवान बनने का सपना देखा और अभ्यास करना शुरू कर दिया।
लाइमलाइट और राजनीति से दूर उन्होंने सिर्फ़ अपने खेल पर फोकस रखा। अब महज 21 साल की उम्र में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। ।
शानदार! उम्मीद है अब इन्हें उचित सम्मान मिलेगा।

