पश्चिम बंगाल में सत्ता विरोधी लहर का फायदा क्या उठा पाएगी भाजपा?
क्या पीएम मोदी व गृहमंत्री अमित शाह की जोड़ी इस बार पश्चिम बंगाल की विधानसभा में भगवा ध्वज फहराने में हो जाएगी कामयाब?
(कलीम उल्ला फारूकी)
पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। सवाल सीधा है कि क्या सत्ताविरोधी माहौल को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने पक्ष में मोड़ पाएगी? या फिर ममता बनर्जी का जादू एक बार फिर कायम रहेगा?
हालांकि पिछले लगभग 10 सालों से भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल की सत्ता पर कवित होने का एक संयोजित प्लान बना रखा था पिछले विधानसभा चुनाव में उसे सत्ता तो हासिल नहीं हुई किंतु एक मजबूत विपक्ष के रूप में उसने पश्चिम बंगाल की राजनीति में अपनी पहचान अवश्य बना ली थी।
यद्यपि पिछला विधानसभा चुनाव बीजेपी हार गई थी इसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी ने अपने कुशल रणनीतिकार सुनील बंसल समय तमाम भाजपा नेताओं को 2026 विधानसभा चुनाव के लिए मजबूती से काम करने के लिए पश्चिम बंगाल में लगा दिया था जिसका नतीजा आज सामने आया कि भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी को सत्ता से बाहर करने के स्थिति में पहुंच चुकी है।
वैसे राज्य में चुनावी हवा भले ही बदलाव की सुगबुगाहट दिखा रही हो, लेकिन जमीन पर हालात इतने सरल नहीं हैं।
देखा जाये तो इस बार के चुनावों में भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगातार रैलियां, केंद्रीय नेतृत्व की सक्रियता और संगठन की आक्रामक रणनीति यह संकेत देती है कि पार्टी किसी भी कीमत पर बंगाल में सत्ता का स्वाद चखना चाहती है। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) भी अपनी पकड़ ढीली पड़ने देने के मूड में नहीं है। ममता बनर्जी, जो लंबे समय से राज्य की राजनीति का केंद्र रही हैं, अब भी अपने जनाधार और कल्याणकारी योजनाओं के भरोसे मैदान में डटी हुई हैं।
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