समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आज प्रेस कॉन्फ़्रेंस में केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि आम लोगों को महँगाई की मार का सामना करना पड़ रहा है और बेरोज़गारी बढ़ती जा रही है। उनकी दलील थी कि न सिर्फ गरीब और मध्यम वर्ग बल्कि युवा भी “उम्मीद खो चुके” हैं क्योंकि रोज़गार के साधन कम हुए हैं।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार सिर्फ बड़े उद्योगपतियों और आर्थिक तौर पर सशक्त वर्गों को ही फायदा पहुंचा रही है, और सामान्य जनता के कल्याण की बात उसके एजेंडे में कहीं पीछे रह गई है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव नज़दीक आ रहे हैं और जनता अपनी नाराज़गी को वोट में ज़ाहिर करेगी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे यह दावा किया कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो वे महँगाई कम करने, रोजगार बढ़ाने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाएंगे। उनकी योजना में छोटे और सीमांत किसानों को सीधे आर्थिक सहारा देना, युवाओं को स्टार्ट-अप और स्वरोज़गार के अवसर प्रदान करना और स्थानीय व्यवसायों को मजबूत करना शामिल है।
उनकी बातों का राजनीतिक विश्लेषकों ने यह अर्थ निकालने की कोशिश की है कि यह बयान सिर्फ रोज़मर्रा की आलोचना नहीं है, बल्कि आगामी चुनावों के लिए रणनीतिक हमला हो सकता है—खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ युवा और किसानों का खासा जनाधार है।

